यह श्रेष्ठ कविताओं में पाठकों की रुचि बढ़ाने का एक व्यक्तिगत प्रयास है। लक्ष्य यह है कि मैं कविता की प्रत्येक पंक्ति और छंद को कैसे समझता हूँ, उसका आंशिक रूप से वर्णन प्रस्तुत करूँ। कभी-कभी प्रयास शाब्दिक अर्थ प्रस्तुत करने का होता है और कभी-कभी प्रयास काव्य के वाक्य या वाक्यांश की मेरी समझ को प्रस्तुत करने का होता है। मैंने कवयित्री/कवि और कविता से जुड़ी थोड़ी जानकारी भी दी है। लेकिन मेरा उद्देश्य काव्य की मीमांसा लिखना नहीं है।
एक मुख्य दिशानिर्देश, लेख में मेरी व्याख्या को कम से कम रखना है। इसका उद्देश्य है कि एक पाठक जिसकी कविता में गहरी रुचि है और उसे थोड़ी मदद की ज़रूरत है, वह कविता का रसास्वादन करने की यात्रा शुरू कर सके। आशा है कि कविता का रसास्वादन करने की यात्रा अधिकांश भाग में पाठक की व्यक्तिगत यात्रा होगी। इसीमें कविता का आनंद समाया है।
भारतीय काव्यशास्त्र यह स्वीकार करता है कि प्रत्येक कविता का प्रत्येक पाठक पर एक अलग प्रभाव होता है। आशा है कि यह वेबसाइट अधिक से अधिक कविता प्रेमियों को महान भारतीय कवियत्रियों और कवियों की कविताओं में अपना आनंद पाने में सहायता करने में सक्षम होगी।
१. पूछता क्यों शेष कितनी रात? - महादेवी वर्मा
३. मौन-निमंत्रण - सुमित्रानंदन पंत
मैं भारत तथा विश्व की संस्कृति और अतीत एवं वर्तमान के अनगिनत व्यक्तियों और प्राणियों का आभारी हूँ। मुझे प्राकृतिक भव्यता से भी बहुत प्रेरणा मिली है। कवि प्रदीपजी का लिखा गाना "चल अकेला" मेरे लिए जीवन भर एक शक्ति का स्रोत रहा है। गाने को मुकेश ने गाया है और संगीत ओ पी नैयर ने दिया है।
मेरा नाम धीरेन्द्र दत्त त्रिपाठी है। मेरा जन्म विदिशा, मध्य प्रदेश का है। मैं विदिशा, भोपाल, मुंबई और कानपुर में रहा हूँ। अब मैं अहमदाबाद में रहता हूँ।